"चाहते जब पंख पसारती हैं,
तो तलाश यहाँ शुरू हो जाती हैं,
मुश्किलें चाहे हजार हो,
पर राह आसान लगने लगती हैं,
विश्वास जब मजबूत हों,
तो ये दुनिया ओर हसीं लगने लगती हैं,
ईश जब दिल में हो,
तो ये पूजा अर्चना सफल हो जाती हैं,
तब पत्थर में भी ईश्वर जीवंत लगने लगता हैं।"
- अर्चना
ये कविता मेरी पुस्तक ‘ॐ शिवोहम’ से ली गईं हैं।

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